|
| 1 | shankargarh |
| 2 | सीमांकन तथा संरक्षण |
| 3 | मृदा परीक्षण |
| 4 | लैंड स्केप पर बनाने पर व्यय |
| 5 | मिट्टी का विश्लेषण कर मिट्टी सम्बर्धन हेतु पोषक सामाग्री कटी घास |
| 6 | ड्रम 200 लीटर क्षमता का |
| 7 | बाल्टी |
| 8 | हजारा |
| 9 | स्प्रे मशीन |
| 10 | जीवामृत तैयार करने हेतु सामाग्रीदेशी / पहाडी का गौमूत्र |
| 11 | गाय का गाबर |
| 12 | दाल का आटा, बेसन |
| 13 | पीपल पेड के जड़ के पास की मिट्टी |
| 14 | फेंसिग सामाग्रीएंगिल आयरन 35x35x5 mm 6 फीट लम्बा तथा बीच मे 5 सुराख |
| 15 | प्लासटिक की जाली 6 फिट ऊचा 40 मी0 लम्बाई में कुल क्षेत्र लगभग 810 वर्गफीट |
| 16 | पौध को सहारा देने हेतु सहायक छड़ी 5 फीट लम्बाई मजबूत एवं ठोस आकार की |
| 17 | जूट के धागे |
| 18 | जे०सी०वी० मशीन से भूमि पर 1 मीटर गहरा 5 खदान कार्य (वर्ग मी०) |
| 19 | यांत्रिक विधि से खोदी गई आधी मिट्टी को वापस ट्रैच में डाला तथा मिट्टी का सामान रूप से फैलानाबग्योमास मिश्रण का आधा भाग ट्रंच में तथा आधा भाग मिट्टी के टिले पर सामान रूप से फैलाना |
| 20 | जे०सी0बी0 मशीन से बायोमास का मिश्रण कार्य |
| 21 | फावड़ा से टिले पर छोटा सा गडढा जिसमें पौध आराम से बैठ सकें गडढा खुदान |
| 22 | पौधों के थैली को जीवामृत मिश्रित पानी को घोल में डूबाना तथा जीवामृत का पानी सोखने के बाद थैली पौधो को जीवामृत से अलग कराना |
| 23 | पौध रोपण एवं पौधो को छडी से सहारा देना |
| 24 | मिटटी के ऊपर 5 से 7 इच मोटी पुआल बिछाना तथा 30 खूटी गाडकर रस्सी से बाधना जिससे पुआल उड न सकें। |
| 25 | सिचाई कुल 24 बार |
| 26 | पौधो की कीमत 3 प्रतिशत अतिरिक्तवृक्ष |
| 27 | सहवृक्ष |
| 28 | पौधे (हर्ब) |
| 29 | सुरक्षा श्रमिक |
| 30 | सैपलिंग स्टोरेज |
| 31 | द्वितीय\" वर्ष अनुरक्षणसिचाई अप्रैल से जून तक माह में 10 बार अक्टूबर तथा नवम्बर माह में 05 बार जनवरी ए फरवरी माह में 04 बार मार्च मे 05 बार कुल 53 बार |
| 32 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 33 | सुरक्षा श्रमिक |
| 34 | तृतीय वर्ष अनुरश्रणसिचाई कुल 24 बार |
| 35 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 36 | सुरक्षा श्रमिक |
| 37 | अतिरिक्त्त संसाधनबोरिंग तथा प्रेसर पम्प |
| 38 | Shivdaspur |
| 39 | सीमांकन तथा संरक्षण |
| 40 | मृदा परीक्षण |
| 41 | लैंड स्केप पर बनाने पर व्यय |
| 42 | मिट्टी का विश्लेषण कर मिट्टी सम्बर्धन हेतु पोषक सामाग्री कटी घास |
| 43 | ड्रम 200 लीटर क्षमता का |
| 44 | बाल्टी |
| 45 | हजारा |
| 46 | स्प्रे मशीन |
| 47 | जीवामृत तैयार करने हेतु सामाग्रीदेशी / पहाडी का गौमूत्र |
| 48 | गाय का गाबर |
| 49 | दाल का आटा, बेसन |
| 50 | पीपल पेड के जड़ के पास की मिट्टी |
| 51 | फेंसिग सामाग्रीएंगिल आयरन 35x35x5 mm 6 फीट लम्बा तथा बीच मे 5 सुराख |
| 52 | प्लासटिक की जाली 6 फिट ऊचा 40 मी0 लम्बाई में कुल क्षेत्र लगभग 810 वर्गफीट |
| 53 | पौध को सहारा देने हेतु सहायक छड़ी 5 फीट लम्बाई मजबूत एवं ठोस आकार की |
| 54 | जूट के धागे |
| 55 | जे०सी०वी० मशीन से भूमि पर 1 मीटर गहरा 5 खदान कार्य (वर्ग मी०) |
| 56 | यांत्रिक विधि से खोदी गई आधी मिट्टी को वापस ट्रैच में डाला तथा मिट्टी का सामान रूप से फैलानाबग्योमास मिश्रण का आधा भाग ट्रंच में तथा आधा भाग मिट्टी के टिले पर सामान रूप से फैलाना |
| 57 | जे०सी0बी0 मशीन से बायोमास का मिश्रण कार्य |
| 58 | फावड़ा से टिले पर छोटा सा गडढा जिसमें पौध आराम से बैठ सकें गडढा खुदान |
| 59 | पौधों के थैली को जीवामृत मिश्रित पानी को घोल में डूबाना तथा जीवामृत का पानी सोखने के बाद थैली पौधो को जीवामृत से अलग कराना |
| 60 | पौध रोपण एवं पौधो को छडी से सहारा देना |
| 61 | मिटटी के ऊपर 5 से 7 इच मोटी पुआल बिछाना तथा 30 खूटी गाडकर रस्सी से बाधना जिससे पुआल उड न सकें। |
| 62 | सिचाई कुल 24 बार |
| 63 | पौधो की कीमत 3 प्रतिशत अतिरिक्तवृक्ष |
| 64 | सहवृक्ष |
| 65 | पौधे (हर्ब) |
| 66 | सुरक्षा श्रमिक |
| 67 | सैपलिंग स्टोरेज |
| 68 | द्वितीय\" वर्ष अनुरक्षणसिचाई अप्रैल से जून तक माह में 10 बार अक्टूबर तथा नवम्बर माह में 05 बार जनवरी ए फरवरी माह में 04 बार मार्च मे 05 बार कुल 53 बार |
| 69 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 70 | सुरक्षा श्रमिक |
| 71 | तृतीय वर्ष अनुरश्रणसिचाई कुल 24 बार |
| 72 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 73 | सुरक्षा श्रमिक |
| 74 | अतिरिक्त्त संसाधनबोरिंग तथा प्रेसर पम्प |
| 75 | Bhadokhar |
| 76 | सीमांकन तथा संरक्षण |
| 77 | मृदा परीक्षण |
| 78 | लैंड स्केप पर बनाने पर व्यय |
| 79 | मिट्टी का विश्लेषण कर मिट्टी सम्बर्धन हेतु पोषक सामाग्री कटी घास |
| 80 | ड्रम 200 लीटर क्षमता का |
| 81 | बाल्टी |
| 82 | हजारा |
| 83 | स्प्रे मशीन |
| 84 | जीवामृत तैयार करने हेतु सामाग्रीदेशी / पहाडी का गौमूत्र |
| 85 | गाय का गाबर |
| 86 | दाल का आटा, बेसन |
| 87 | पीपल पेड के जड़ के पास की मिट्टी |
| 88 | फेंसिग सामाग्रीएंगिल आयरन 35x35x5 mm 6 फीट लम्बा तथा बीच मे 5 सुराख |
| 89 | प्लासटिक की जाली 6 फिट ऊचा 40 मी0 लम्बाई में कुल क्षेत्र लगभग 810 वर्गफीट |
| 90 | पौध को सहारा देने हेतु सहायक छड़ी 5 फीट लम्बाई मजबूत एवं ठोस आकार की |
| 91 | जूट के धागे |
| 92 | जे०सी०वी० मशीन से भूमि पर 1 मीटर गहरा 5 खदान कार्य (वर्ग मी०) |
| 93 | यांत्रिक विधि से खोदी गई आधी मिट्टी को वापस ट्रैच में डाला तथा मिट्टी का सामान रूप से फैलानाबग्योमास मिश्रण का आधा भाग ट्रंच में तथा आधा भाग मिट्टी के टिले पर सामान रूप से फैलाना |
| 94 | जे०सी0बी0 मशीन से बायोमास का मिश्रण कार्य |
| 95 | फावड़ा से टिले पर छोटा सा गडढा जिसमें पौध आराम से बैठ सकें गडढा खुदान |
| 96 | पौधों के थैली को जीवामृत मिश्रित पानी को घोल में डूबाना तथा जीवामृत का पानी सोखने के बाद थैली पौधो को जीवामृत से अलग कराना |
| 97 | पौध रोपण एवं पौधो को छडी से सहारा देना |
| 98 | मिटटी के ऊपर 5 से 7 इच मोटी पुआल बिछाना तथा 30 खूटी गाडकर रस्सी से बाधना जिससे पुआल उड न सकें। |
| 99 | सिचाई कुल 24 बार |
| 100 | पौधो की कीमत 3 प्रतिशत अतिरिक्तवृक्ष |
| 101 | सहवृक्ष |
| 102 | पौधे (हर्ब) |
| 103 | सुरक्षा श्रमिक |
| 104 | सैपलिंग स्टोरेज |
| 105 | द्वितीय\" वर्ष अनुरक्षणसिचाई अप्रैल से जून तक माह में 10 बार अक्टूबर तथा नवम्बर माह में 05 बार जनवरी ए फरवरी माह में 04 बार मार्च मे 05 बार कुल 53 बार |
| 106 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 107 | सुरक्षा श्रमिक |
| 108 | तृतीय वर्ष अनुरक्षणसिचाई कुल 24 बार |
| 109 | गुडाई तथा मलचिंग 02 बार |
| 110 | सुरक्षा श्रमिक |
| 111 | अतिरिक्त्त संसाधनबोरिंग तथा प्रेसर पम्प Please Enable Macros to View BoQ information |